प्राइमरी स्कूल में शिक्षा का मजाकः यहां भविष्य बनता नहीं, बिगड़ता है

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अलीगढ़ के खैर क्षेत्र के एक स्कूल की दो तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें पहली तस्वीर में शिक्षक छात्रों को नहीं बल्कि छात्र ही खुद साथी छात्रों को पढ़ा रहे हैं और दूसरी तस्वीर में मिड-डे मील का खाना अन्य छात्रों के लिए एक छात्रा बना रही है। इतना ही नहीं अभी तक छात्र दो वर्ष पुरानी किताबों को पढ़ रहे हैं। आश्चर्यचकित कर देने वाली यह सच्चाई यूपी के सरकारी स्कूलों के एजूकेशन सिस्टम को बयां करने के लिए काफी है। पूरे मामले से अधिकारियों के वाकिफ होने के बाद भी अनभिज्ञ बने हैं।
 प्रदेश सरकार यूपी में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने में जुटी है, सरकारी स्कूलों को प्राइवेट प्ले स्कूलों की तरह बनाने की कवायद भी चल रही है। वहीं दूसरी तरफ खैर क्षेत्र के कसीसो में नरसिंह पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा का मजाक बनाया जा रहा है। इस स्कूल में शिक्षक सिर्फ वेतन के लिए नौकरी करते हैं, उन्हें छात्रों के भविष्य की कोई चिंता नहीं, बच्चों को पढ़ाने के बजाए छुट्टी अधिक मनाते हैं। जिसकी वजह से स्कूल में 3 दर्जन बच्चों में से महज 6 बच्चे कक्षा में पढ़ते नजर आ रहे हैं। घरेलू कपड़ों में बच्चे बिना यूनिफॉर्म के पढ़ रहे हैं, बच्चों के हाथ में जो किताबें हैं वह पुरानी और फटी हुई है जो कि 2014 -15 और 2015-16 के सिलेबस की है, जबकि अब 2017 का सत्र चल रहा है जबकि प्रदेश सरकार किताबों से लेकर यूनिफाॅर्म तक मुहैया कराती है, तो सवाल उठता है कि उनका लाभ इन्हें क्यों नहीं मिला?
अब स्कूल की दूसरी हकीकत देखिए, एक छोटी सी बच्ची रोटियाँ बेल रही है… आटा गूंद रही है… उसके आगे चूल्हा चल रहा है… एक महिला रोटियाँ सेक रही है… यह बच्ची भी अपने आपको छात्रा बता रही है लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल में बंटने वाले मिड-डे मील के खाने को भी तैयार करवाती है।
स्कूल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के सवाल पर प्रिंसिपल भी बचाव में आ गए। स्कूल में पढ़ा रहे एक अध्यापक की योग्यता तो देखिए, जब पूछा गया कि जिले के जिलाधिकारी व कमिश्नर का क्या नाम है… तो बता नहीं पाए।
स्कूल की स्थिति से जब अलीगढ़ के जिलाधिकारी को अवगत कराया तो उन्होंने बताया कि बीएसए को मामले की जांच के लिए कहा गया है, जो तथ्य निकल कर सामने आएंगे, कार्यवाही की जाएगी, बात अगर पुरानी किताबों की कहें तो ऐसा हो जाता है कि जब सिलेबस लेट हो जाता है तो पुरानी किताबों से पढ़ाई को पूरा कराया जाता है। शायद डीएम भी इस बात से अंजान हैं कि सिलेबस अलीगढ़ में पहुंच चुका है ।

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